गर्मियों की रात
“माँ, यह गलत है,” मयंक ने कहा लेकिन उसका लंड और भी ज्यादा कड़ा हो गया।
“कोई नहीं देख रहा बेटा। तुम्हारे पापा भी महीने में एक बार आते हैं। मैं बहुत अकेली हो गई हूं,” सीमा ने रोते हुए कहा।
मयंक का दिल पिघल गया। उसने अपनी माँ को गले लगा लिया। उनके नंगे बदन एक दूसरे से चिपक गए।
“मैं तुम्हें खुश रखूंगा माँ,” मयंक ने कहा।



