Ma ki suhagrat doosre ki shadi me
“आह धीरे करो आह, पागल हो गए हो क्या?” ऐसी आवाजें बाहर आ रही थी। हमने भी दोस्त को कॉल करके बोला: तेरी आवाज बाहर आ रही है। थोड़ा आराम से, जैसा तेरी बीवी बोल रही धीरे करने को।
“आह धीरे करो आह, पागल हो गए हो क्या?” ऐसी आवाजें बाहर आ रही थी। हमने भी दोस्त को कॉल करके बोला: तेरी आवाज बाहर आ रही है। थोड़ा आराम से, जैसा तेरी बीवी बोल रही धीरे करने को।
एक दिन वो आई, और चीज खरीद कर, रुपए देकर इतनी जल्दी में गई, कि मुझे लगा पता नहीं क्या हो गया। फिर मैंने रुपए खोल कर देखा तो उसमें एक पर्ची थी। उसमें उसका नंबर लिखा हुआ था। मैं ये देख कर बड़ा खुश हुआ। फिर मैंने अपने आप को संभाला और उसे कॉल करी, तो उसने तुरंत ही कॉल उठा ली। ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरी ही कॉल का इंतजार कर रही थी।
और वो मेरे पास आ कर मुझे किस करने लगी। मैं भी उसको किस करने लगा। फिर मैंने सपना को उठा लिया और उसको कमरे में ले आया। आते ही उसको बैड पर लिटा दिया, और खुद उसके ऊपर चढ़ गया। फिर सपना के रसीले होंठ चूमने लग गया। कभी सपना के पूरे चेहरे को चूमता, तो कभी उसके होंठ को। सपना भी मेरा साथ दे रही थी।
अपनी ही बड़ी बहन की शादी किसी और के साथ होते देखना किसी भी भाई के लिए बहुत मुश्किल होता है। और जब आप उनसे प्यार करते हों, तो यह दर्द और भी बढ़ जाता है। लेकिन यह कहानी उनकी शादी की नहीं है। यह कहानी उस आख़िरी महीने की है, जो हमने उनकी शादी से पहले साथ बिताया। उस एक महीने में हमने हर पल एक-दूसरे के साथ जिया और अपने प्यार को पहले से कहीं ज़्यादा गहराई से महसूस किया।