गर्मियों की रात
गर्मियों की रात
गर्मियों की रात मयंक एक 25 साल का युवक था जो देहरादून में अपने माता-पिता के साथ रहता था। उसके पिता सरकारी नौकरी में थे और अक्सर टूर पर रहते थे। माँ, सीमा, 45 साल की थी लेकिन दिखने में 35 की लगती थी। वह जिम जाती थी और अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखती थी।
गर्मियों की छुट्टियों में मयंक घर आया था। उसके पिता एक महीने के लिए दिल्ली गए हुए थे। घर में सिर्फ मयंक और उसकी माँ थे।
एक रात बिजली चली गई। गर्मी बहुत थी। मयंक छत पर सोने चला गया। कुछ देर बाद उसकी माँ भी छत पर आ गई।
“यहाँ हवा है थोड़ी,” सीमा ने कहा।
उसने सफेद रंग की नाइटी पहनी हुई थी जो पसीने से चिपक गई थी। मयंक की नजर अनजाने में उसके उभारों पर गई। वह शर्मा गया और पलट लिया।
“क्या हुआ बेटा? कुछ गलत है?” सीमा ने पूछा।
“नहीं माँ, कुछ नहीं,” मयंक ने कहा।
लेकिन उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। उसने कभी अपनी माँ को इस नजर से नहीं देखा था। लेकिन अब वह एक सुंदर औरत लग रही थी।
अगले दिन मयंक ने नोटिस किया कि माँ घर में ज्यादा आजाद हो गई थी। वह अक्सर ब्रा के बिना घूमती और उसके सामने झुक जाती। मयंक समझ गया कि माँ भी कुछ चाहती थी।
शाम को मयंक बाथरूम में नहा रहा था। दरवाजा खुला था। सीमा अंदर आ गई।
“साबुन देना बेटा,” उसने कहा।
मयंक हैरान रह गया। उसकी माँ उसे नंगा देख रही थी और उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उसका लंड खड़ा हो गया।
सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, “लगता है मेरा बेटा बड़ा हो गया है।”
“माँ, प्लीज जाओ,” मयंक ने कहा।
“क्यों? मैंने तुम्हें बचपन में नहाते हुए कितनी बार देखा है। अब शर्मा क्यों रहे हो?” सीमा ने कहा और अपनी नाइटी उतार दी।
मयंक देखता रह गया। उसकी माँ बिल्कुल नंगी थी। उसके बड़े बड़े बूब्स थे, कमर पतली, और चूत पर थोड़े बाल थे।
“माँ, यह गलत है,” मयंक ने कहा लेकिन उसका लंड और भी ज्यादा कड़ा हो गया।
“कोई नहीं देख रहा बेटा। तुम्हारे पापा भी महीने में एक बार आते हैं। मैं बहुत अकेली हो गई हूं,” सीमा ने रोते हुए कहा।
मयंक का दिल पिघल गया। उसने अपनी माँ को गले लगा लिया। उनके नंगे बदन एक दूसरे से चिपक गए।
“मैं तुम्हें खुश रखूंगा माँ,” मयंक ने कहा।
सीमा ने उसके लंड को पकड़ लिया। वह 8 इंच का था और मोटा।
“वाह, मेरा बेटा तो बहुत बड़ा है,” सीमा ने कहा और घुटनों के बल बैठकर उसे चूसने लगी।
मयंक ने आंखें बंद कर लीं। उसकी माँ का मुँह गर्म था और वह अच्छे से चूस रही थी। वह उसके लंड को पूरा गले तक ले जा रही थी।
“उम्म्ह… अह्ह… माँ… बहुत मजा आ रहा है,” मयंक कराहने लगा।
सीमा ने उसे बाथरूम से बाहर बेडरूम में ले जाया। उसने मयंक को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गई।
“आज मैं तुम्हें असली मर्द बनाउंगी,” सीमा ने कहा।
उसने मयंक के लंड पर अपनी चूत रखी और धीरे से बैठ गई। वह पहले बहुत टाइट थी। मयंक को लगा जैसे उसका लंड किसी गर्म और गीली जगह में फंस गया हो।
“आह्ह… बेटा… तुम्हारा बहुत मोटा है,” सीमा चीखी।
धीरे-धीरे वह ऊपर नीचे होने लगी। उसके बूब्स उछल रहे थे। मयंक ने उन्हें पकड़ लिया और चूसने लगा।
“हां… ऐसे ही… चूसो… और जोर से,” सीमा चिल्लाने लगी।
वह तेजी से उछल रही थी। बिस्तर की क्वीकें चरमरा रही थीं। मयंक ने उसकी कमर पकड़ी और नीचे से धक्के मारने लगा।
“ओह्ह… बेटा… तुम तो निक्कर से भी बेहतर हो… और तेज… मुझे फाड़ दो,” सीमा पागल होकर बोली।
उन्होंने 15 मिनट तक लगातार किया। फिर मयंक ने उसे कुत्ते की तरह बनाया और पीछे से डालना शुरू किया। सीमा की गांड बहुत गोल थी। मयंक ने एक उंगली उसकी गांड में डाली।
“आह्ह… वहां मत… पहली बार है,” सीमा ने कहा।
“माँ, मजा आएगा,” मयंक ने कहा और धीरे से अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया।
सीमा चीख पड़ी लेकिन फिर शांत हो गई। मयंक धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा। कुछ देर में सीमा को भी मजा आने लगा।
“हां… बेटा… अब तेज करो… मैं झड़ने वाली हूं,” सीमा ने कहा।
मयंक ने जोर-जोर से धक्के मारे। सीमा झड़ गई और उसकी चूत से पानी निकलने लगा। मयंक ने भी अपना सारा माल उसकी गांड के अंदर छोड़ दिया।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। सीमा ने मयंक को कसकर गले लगाया।
“मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं बेटा,” उसने कहा।
“मैं भी माँ,” मयंक ने जवाब दिया।
उस रात से हर रात वे एक साथ सोते और प्यार करते। जब तक पिता नहीं आए, वे पति-पत्नी की तरह रहे। यह उनका गुप्त रिश्ता था जो कभी खत्म नहीं हुआ…













