भाई बहन की करतूतें – 2
भाई बहन की करतूतें – 2
पिछली कहानी में अपने पढ़ा अब उसके आगे , दोस्तों कहानी लम्बी है इसलिए कई पार्ट है पिछली कहानी का लिंक ये रहा
“नहीं,” मैंने निकिता की आँख़ों में आँख़ें डालकर बोला, ” यू नो, मैं और सोनम एक दो बार उस के घर पर ही मस्ती में किस विस कर चुके हैं।”
“तुम और पूनम,” निकिता ने रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा, ”विशाल, यानि बड़ा।” फ़िर कुछ सैकण्ड के बाद कुछ सोचकर उसने बोला, ”तुमने सोनम के साथ और कुछ नही किया, मेरा मतलब”
”नहीं,” मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ”बस किस ही किया था।”
“लेकिन, मन तो किया होगा, क्यों?” निकिता ने पुछा, मानो उसको जवाब पहले से पता था।
”हाँ,” मैंने जाहिर सा जवाब दिया, ”लेकिन यू नो, हमने सचमुच कुछ नहीं किया।”
”और किस को किस किया है?” निकिता ने मेरी आँख़ों में आँख़ें डालकर देखते हुए पूछा। वो मेरी पूरी तहकीकात करने के मूड में थी, ”बताओ ना, और किस के साथ?”
मैंने बात को पलटते हुए कहा, ”हैं कुछ जिनको तुम नहीं जानतीं, लेकिन वो भी बदसूरत नहीं हैं। तुम अपने बारे में बताओ, तुमने कितने लड़कों को किस किया है?” मन ही मन मैं इस सवाल का जवाब पहले से जानता था।
निकिता ने मेरी तरफ़ चेहरा घुमाकर सीरियस होते हुए कहा, ”किसी को भी नहीं,” उसकी आवाज दबी हुई थी, ”मुझे तो ये भी नहीं पता कि किस करते कैसे हैं।”
“इसमें कौन सी रॉकेट साईंस है,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, मैं अब समझ चुका था कि इस विषय के डिस्कशन पर अब मेरा अपर हैण्ड है।
”ओह, तुम तो बहुत बड़े एक्सपर्ट हो?” निकिता मुस्कुराते हुए बोली। ”बस इसलिये कि तुम कुछ लड़कियों को किस कर चुके हो।” उसने चुनौती भरे अन्दाज में बोला, और फ़िर पूछा, ”फ़िर भी, बताओ ना कैसा लगता है?”
“गुड,” मैंने अपने कन्धे उँचकाकर मजाकिया लहजे में होंठ दबाकर जवाब दिया। ”इट्स जस्ट,” मैंने किसी बेहतर शब्द की तलाश में एक छोटा सा पॉज लिया, और फ़िर कहा ” जस्ट गुड्।”
“कैन आई ट्राई इट?” निकिता ने मेरे पास खिसकते हुए मेरी तरफ़ देखते हुए पूछा।
“व्हाट डू यू मीन?” मैंने उसकी तरफ़ देखते हुए पूछा। मुझे उसकी बात अच्छी तरह समझ आ चुकी थी, और मैं ये भी जानता था कि वो मेरे साथ ट्राई करना चाहती है, लकिन मुझे उसके कहे हुए शब्दों पर विश्वास नहीं हो रहा था, इसलिये मैं डबल श्योर होना चाहता था।
”मैं तो बस तुम्हारे साथ ट्राई करके ये देखना चाहती थी कि किस करने में लगता कैसा है,” निकिता ने मासुमियत के साथ कहा, ”जिस से कभी अगर किसी लड़के या अपने पति के साथ करने का जब भी चांस मिले तो कम से कम पता तो हो।”
”व्हाई नॉट?” मैंने ऐसे अन्दाज में कहा मानो मुझे इस से कोई आपत्ती ना हो। मैं तो मन ही मन निकिता को ना जाने कब से किस करना चाहता था, लेकिन मैं अपने आप को बेकरार नहीं दिखाना चाहता था। हम दोनों अगल बगल एक ही सोफ़े पर आमने सामने बैठे थे, लेकिन कोई पहल नहीं कर रहा था। ”वैल, कम ऑन,” निकिता ने मुस्कुरा कर कहा, ”मैंने सोचा तुम मुझे किस करने वाले हो।”
“मैंने सोचा तुम मुझे किस करने वाली हो,” मैंने पलट कर उसके होंठों को देखते हुए जवाब दिया, ”इट वाज योर आईडिया।”
”वैल, लेकिन तुम तो पहले भी कर चुके हो ना,” निकिता ने फ़िर उसी मासूमियत के साथ कहा मानो ये तो अन्डरस्टुड था कि मुझे ही शुरुवात करनी थी। ”ओके,” मैंने उसके और करीब आते हुए कहा।
मैंने उसकी तरफ़ झुकते हुए निकिता के कन्धों पर अपनी बाहें रख दी, और उसको प्यार से अपनी तरफ़ खींच लिया, और फ़िर उसके उपर झुकते हुए हल्के से अपने होंठ उसके नर्म मुलायम होंठों पर रख दिये। मैं भी एक्स्पेर्ट तो था नहीं, लेकिन फ़िर भी मैंने किस करना जारी रखा, मेरे पूरे बदन में उत्तेजना की एक लहर सी दौड़ गयी। हम दोनों के चेहरे इतने करीब थे कि मैं निकिता की साँसों को मेहसूस कर पा रहा था। मैं उसके रेस्पोंस को जानने के लिये उसकी तरफ़ देखने लगा। वो बिना कुछ बोले बस आधा सा मुस्कुरा भर दी, और फ़िर आगे बढकर मेरे होण्ठो को फ़िर से किस करने लगी। इस बार निकिता किस किये जा रही थी, और मेरे बदन में एक बार फ़िर से उत्तेजना की एक गजब सी लहर दौड़ गयी, ये लहर पिछली लहर से कहीं ज्यादा ताकतवर थी। मुझे पता था कि जो हम कर रहे थे वो गलत था, लेकिन साथ साथ ये उतना ही रोमांचक और अविश्वस्नीय भी था।
एक बार फ़िर से हम दोनों ने एक दूसरे की आँख़ों में देखा, हम दोनों के चेहरे बेहद करीब थे, मैंने पूछा, ”तो फ़िर, कैसा लगा?”
”थैन्क्स, लेकिन थोड़ी प्रैक्टीस और कर लेते हैं,” निकिता ने धीमे से फ़ुसफ़ुसाते हुए कहा। उसने अपने होन्ठों पर जीभ फ़िरा कर उनको गीला किया और फ़िर से मुझे पहले की तरह किस करने लगी। मैं हर पल और ज्यादा बेकरार होता जा रहा था। हम दोनों के मुँह थोड़े से खुले हुए थे, लेकिन जीभ का अभी कोई रोल नहीं था, मैं बस ऐसे ही करते रहना चाहता था, जब तक वो मुझे ऐसा करते रहने देती।
निकिता ने किस करना बन्द किया और थोड़ा पीछे होकर बैठ गयी। ”ऐसे ही करते हैं ना?” उसने पूछा।
”मेरे विचार से कोई रूल तो होते नहीं हैं,” मैंने कहा, मेरी बाँहें अभी भी उसके कंधों पर ही थीं। मैं उम्मीद कर रहा था कि ये यहीं पर खत्म ना हो।
”तुमने सोनम के साथ ऐसे ही किया होगा ना?” निकिता ने पूछा, वो थोड़ा और पीछे खिसक गयी, और मैंने अपनी बाँहें उसके कन्धों पर से हटा लीं और मैं सोफ़े पर बैक का सहारा लेकर बैठ गया। मैंने सोचा कि किसिंग अब खत्म हो गयी है, लेकिन फ़िर भी मुझे कुछ कुछ हो रहा था।
”हाँ काफ़ी कुछ इसी तरह से,” मैंने कहा।
”एक बार फ़िर से करना चाहोगे?” निकिता ने पूछा। उसकी आवाज में उत्सुकता था, और वो मुझे उकसा रही थी। इससे पहले कि मैं कुछ जवाब देता, वो घूमकर मेरे सामने आ गयी और अपनी लम्बी सुडौल टांगें मेरी गोद में रख दीं, और थोड़ा पीछे खिसक कर सोफ़े की साईड का सहारा लेकर बैठ गयी। मैं अभी तक चुप था और वो बोले जा रही थी, ”इमेजिन करो कि मैं अभी जो हम मूवी देख रहे थे उसकी हिरोइन हूँ और तुम हीरो।” वो बिना हिले वैसे ही आराम से अधलेटी होकर बैठी थी, उसकी टाँगें मेरी गोद में थीं, मैं उसको निहार रहा था। मैं घूमकर उसके सामने आ गया, और मैंने दोनों हाथ एक क्षण को उसकी टाँगों की पिंडलियों पर रख दिये, और उसकी कोमल मुलायम त्वचा को स्पर्ष करने लगा। मैंने मुँह में आया हुआ थूक निगला, और फ़िर थोड़ा आगे बढा, और निकिता की टाँगों पर हाथ ऊपर खिसकाने लगा, उसके घुटनों के ऊपर, और फ़िर मैं सोफ़े पर ही थोड़ा और उसके ऊपर आ गया, मैं उसके ऊपर तो था लेकिन मेरा पूरा भार मेरी कोन्हीयों पर ही था, और मेरी बाँहें उसके कन्धों के पीछे। मैंने निकिता के मुँह पर दबाकर किस किया, जैसे मूवी में उस हीरो ने किया था। उस मूवी में किस करते हुए जीभ का भी भरपूर इस्तेमाल दिखाया गया था, तो मैंने भी निकिता के मुँह में धीरे से अपनी जीभ घुसा दी। एक पल को उसने मेरी जीभ को अपने मुँह में पूरी तरह विचरण करने दिया। मैं बेहद उत्तेजित हो गया था, और मुझे ऐसा लग रहा था नस नस में उबाल आ रहा हो।
हम दोनों इसी तरह कुछ मिनट तक बिना कुछ बोले, एक दूसरे के मुँह के कोने कोने की जीभ से तलाशी लेते हुए किस करते रहे। ये सब अपने आप हो रहा था क्योंकि हम दोनों में से ही किसी को भी इस चीज का कोई तजुर्बा नहीं था। इसी बीच हम दोनों अपने आप सोफ़े पर इस पोजीशन में आ गये कि मैं अपनी बाँयीं तरफ़ साईड से लेटा हुआ था और निकिता अपनी दाँयीं तरफ़ साईड से मुझसे चिपकी हुई थी। हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बाँहों मे भर रखा था, और मैं उसकी चूँचियों को अपनी छाती से दबता हुआ मेहसूस कर रहा था, जिससे मजा दोगुना हो रहा था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि ये सब सचमुच में हो रहा है, और जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी कमर पर फ़िराया, तो मेरा हाथ उसकी नंगी कमर को छू रहा था क्योंकि उसका टॉप सोफ़े पर इस तरह इधर उधर खिसकने से ऊपर सरक गया था।
उसकी त्वचा का स्पर्श सुख जादुई था, और जैसे ही मैंने अपना हाथ थोड़ा और सरकाया, मेरा हाथ उसके डेनिम शॉर्ट के वेस्ट बैण्ड को छूने लगा। जब मेरा दाँयां हाथ उसके शॉर्ट के वेस्ट बैण्ड पर था तब मैं अँगुठे से उसकी कमर के निचले हिस्से को सहलाने लगा, तभी निकिता ने किस को ब्रेक कर अपने सिर थोड़ा पीछे कर लिया। मैं उसकी गर्म गर्म साँसों को अपने चेहरे पर मेहसूस करने लगा, और तभी वो फ़ुसफ़ुसाते हुए बोली, ”क्या तुमने कभी किसी लड़की को नीचे वहाँ टच किया है?”
मैंने अपनी गर्दन जोर से ना के इशारे में हिलायी, लेकिन उसके सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। जिस तरह से हम दोनों भाई बहन किस कर रहे थे, उसके बीच इस तरह कुछ भी बोल पाना मेरे लिये बहुत मुश्किल था, लकिन एक निकिता थी जो मुझसे ये सवाल पूछ रही थी। क्या वो सचमुच कुछ और भी आगे करना चाहती थी?
”टच करना चाहोगे?” निकिता ने पूछा।
टच करना चाहोगे? ये तो किसी प्यासे से पानी पीने की इच्छा है क्या? इस तरह का सवाल पूछने जैसा था। फ़िर भी मैंने इस तरह जवाब दिया मानो मुझे इस से कोई ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ता, ”अगर तुम मुझे टच करने दोगी तो।”
निकिता करवट लेकर अपनी पींठ के बल लेट गयी, मेरी दाँयीं बाँह अभी भी उसके ऊपर थी, और मैंने उसको कमर पर से इस तरह पकड़ रखा था जिस से वो सोफ़े से नीचे ना गिर जाये। उसने हाथ नीचे ले जाकर अपने डेनिम शॉर्ट का बटन खोला, और फ़िर उसकी ज़िप खोल दी। उसने मेरी तरफ़ उम्मीद भरी नज़रों के साथ देखा, मानो कह रही हो कि अगला कदम मुझे उठाना होगा। मैं असमंजस में था कि वो मुझसे अपना नेकर उतरवाना चाहती है या फ़िर ऐसे ही अपने नेकर में मेरा हाथ घुसवाकर मुझे टच करने देना चाहती है। मैंने उसके खुले हुए जिपर को देखा और मुझे उसकी अन्दर पहनी हुई नीले रँग की पैन्टी दिखायी दी, फ़िर मैंने नजर उठाकर उसके चेहरे की तरफ़ देखा। निकिता ने अपने हिप्स थोड़ा ऊपर उठा लिये, और हाथ नीचे ले जाकर अपना शॉर्ट घुटने तक नीचे कर दिया, अब वो मेरे सामने नीले रँग की पैन्टी पहने लेटी हुई थी।
मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था कि मुझे क्या करना चाहिये, लेकिन किसी तरह मैंने अपना दाँया हाथ ले जाकर उसके नेकर के ऊपर घुमाने लगा। मैं उसके वहाँ छूना चाहता था, लेकिन ये अनुभव मेरे लिये एकदम नया और अनजान था कि मैं कन्फ़्युज था कि मैं क्या करूँ। सैक्स की सारी फ़ैन्टेसीज में तो मैं सभी लड़कियों को बेझिझक टच करता था, उनको खूब मसलता था और फ़िर ज़ी भर के उनकी चुदाई किया करता था, और आज जब असलियत में लड़की मेरे सामने थी, और वो लड़की भी कोई और नहीं, मेरी सगी छोटी बहन तो मेरी गाँड़ फ़ट रही थी।
मैंने धीमे से पैण्टी के ऊपर से ही अपना हाथ उसके झाँटों के त्रिकोण के ऊपर रखा, और अपनी छोटी ऊँगली को उसकी टाँगों के बीच घुसा के, उस से सहलाने लगा। उसकी चूत से निकल रही गर्माहट को मैं मेहसूस कर रहा था, और मैं भी बहुत एक्साईटेड हो रहा था। निकिता ने मुझे फ़िर से किस किया, उसके मुलायम गर्म होंठ मेरे होंठों को छू रहे थे, और फ़िर वो बोली, ”तुम इसको उतार क्यों नहीं देते?”
मैंने अपने आप पर काबू रखते हुए पैण्टी के वेस्टबैण्ड को अपने हाथ से पकड़ कर पैण्टी को थोड़ा सा खींचकर नीचे कर दिया, और मैं पहला व्यक्ति था जिसने निकिता की झांटों को पहली बार देखा था। निकिता की झांटों को देखकर मुझे कुछ कुछ होने लगा, और जैसे ही निकिता ने अपनी गाँड़ थोड़ा सा ऊपर उठायी मैंने उसके नेकर को नीचे तक खिसका दिया, लेकिन जिस पोजिशन में हम दोनों उस वक्त थे, उसको पूरी तरह उतारना सम्भव नहीं था। ”एक मिनट,” निकिता ने धीमे से कहा, ”मैं इसको खड़े होकर उतार देती हूँ।”
Part 3 coming soon










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