भाई बहन की करतूतें- A super exiting story
भाई बहन की करतूतें – दोस्तों ये नई कहानी मैं हिन्दी फ़ोन्ट में ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँचने के उद्देश्य के साथ प्रस्तुत कर रहा हूँ, आशा करता हूँ कि इस कहानी को भी आप उतना ही प्यार और पसन्द करेंगे।
मेरा नाम श्रेयांश है, और मेरा परिवार उत्तरी भारत के एक छोटे से कस्बे में रहता है। मेरे पिताजी एक पब्लिक सैक्टर युनिट में काम किया करते थे, लेकिन जब मैं सिर्फ़ सात साल का था तभी पापा का दिल का दौरा पड़ने से स्वर्गवास हो गया था। मम्मी की अनुकम्पा के आधार पर पिताजी के ऑफ़िस में ही क्लर्क की नौकरी लग गयी थी।
मेरी मामा और नानी हमारे कस्बे में ही रहते थे मेरे सुन्दर मामा सरकारी ठेकेदार थे, मेरी मामी का देहांत दूसरे बच्चे की डिलीवरी के समय हो गया था, उसके बाद उन्होने दूसरी शादी नहीं की थी, नानी ही उनके दोनों बच्चों को पाल रहीं थीं। जब हम बड़े हो गये थे तब ज्यादातर हर शनिवार और रविवार को मम्मी, मामा के घर नानी के पास उनकी हैल्प करने को चली जाया करती थीं। हमारे मामा हमारी मम्मी से दो साल बड़े थे।
एक बार जब मेरे सुन्दर मामाजी हमारे यहाँ रुके हुए थे तब मामाजी को मैंने मेरी मम्मी से कहते हुए सुना कि मेरे पापा ने मेरे पैदा होने के बाद शायद उनको चड्डी पहनने का भी समय नहीं दिया होगा, उस से पहले ही दोबारा पेल दिया होगा जिसकी वजह से मेरी छोटी बहन पैदा हो गयी। शायद मामाजी को नहीं मालूम कि मैंने उनकी बात सुन ली थी। लेकिन ये बात सच थी कि मेरे और मेरी छोटी बहन निकिता के पैदा होने बीच एक साल से भी कम का अन्तर था, और इसी वजह से बचपन से ही हम दोनों एक दूसरे के बेहद करीब थे।
घर में मैं, मेरी मम्मी शकुंतला, और छोटी बहन निकिता ही रहा करते थे। मम्मी अकेले ही हम दोनों भाई बहन का पालन पोषण कर रहीं थीं, और शायद इसी वजह से हमारे लिये थोड़ा ज्यादा प्रोटेक्टिव थीं, जिसकी वजह से हम दोनों एक दूसरे के और ज्यादा करीब आ गये थे। कई बार ऐसा होता कि हमारे स्कूल की छुट्टी होती, और मम्मी को ऑफ़िस जाना होता, तो मम्मी हम दोनों को घर में बन्द कर के बाहर से ताला लगा कर चली जाया करती थीं। तो इन सब परिस्थितियों में मैं और मेरी बहन बहुत समय एक दूसरे के साथ बिताया करते थे।
जब हम दोनों छोटे छोटे थे शायद पाँच छः साल के होंगे तब तक मम्मी हम दोनों को एक साथ नहलाया करती थीं। स्वाभाविक रूप से मुझे हमेशा ये कौतुहल रहता कि निकिता के पास मेरी तरह लण्ड नहीं था, हाँलांकि तब मैं उसको लण्ड नहीं कहा करता था। मम्मी ने मुझे उसको फ़ुन्नी कहना सिखाया था। और मेरे ख्याल से मम्मी ने तब से हम दोनों को एक साथ नहलाना बन्द कर दिया था जब एक बार मैंने उनसे पूछ लिया था कि निकिता की फ़ुन्नी किस ने काट ली। बाल सुलभ जिज्ञासायें इतनी जल्दी खतम भी नहीं होतीं, और समय के साथ मेरी भी समझ में आ गया कि सभी लड़कियाँ ऐसी ही होती हैं।
हमारी उम्र में ज्यादा अन्तर ना होने की वजह से कई लोग पूछा करते कि हम दोनों जुड़वाँ तो नहीं हैं। हाँलांकि हम दोनों की शक्ल एक जैसी नहीं थी, लेकिन निकिता अपनी उम्र से ज्यादा लम्बी थी, और जब तेरह चौदह साल तक जब मेरी यकायक एक साथ लम्बाई बढी, तब तक हम दोनों की लम्बाई करीब करीब बराबर ही थी। हम दोनों के एक जैसे हल्के काले बाल थे, हाँलांकि बेशक मेरे छोटे थे, एक जैसी गहरी भूरी आँखें, एक सा गेहुँआ रंग। और जब तक मेरा शरीर भरा हुआ गठीला होना शुरु नहीं हुआ था, तब तक दोनों एक जैसे पतले दुबले थे।
जब मेरी छाती और कन्धे चौड़े होने शुरु हुए, तब निकिता के बदन में भी उभार आने शुरु हो गये। वो हमेशा ही पतली दुबली रही, उसकी चुँचियाँ भी छोटी छोटी थीं, लेकिन एक बार जब उसने जवानी की दहलीज पर कदम रखा, तो उसकी गाँड़ पर गजब का उभार आ गया, उसकी टाँगें लम्बी और सुडौल हो गयीं। निकिता ऐश्वर्या राय की तरह खूबसूरत तो नहीं थी लेकिन वो एक सामान्य सुन्दर लड़की थी। मेरे ख्याल से अगर वो बाहर ज्यादा घुमा फ़िरा करती तो लड़के उसके आगे पीछे ही मँडराते रहते, लेकिन वो हमेशा अजनबियों से दूरी ही बना कर रखती। इसकी एक वजह ये भी थी कि मम्मी हम दोनों के लिये कुछ ज्यादा ही प्रोटेक्टिव थीं, और मेरा स्वभाव भी कुछ ऐसा ही हो गया था।
मैं और निकिता कोई साधु सन्त या सन्यासी तो नहीं थे लेकिन फ़िर भी हम दोनों ही ज्यादातर घर पर ही रहा करते थे, और आपस में ही मस्ती करते रहते, हाँलांकि हम दोनों के ही अपने अपने दोस्त भी थे। हम दोनों की एक कॉमन फ़्रेन्ड सोनम हमारी गली में ही रहती थी। सोनम मेरी हमउम्र थी और मेरी ही क्लास में पढती थी, सोनम मेरी जिन्दगी में पहली लड़की थी जिसको मैंने किस किया था, शायद इसी वजह से सोनम मेरे लिये किसी अचीवमेन्ट से कम नहीं थी। जब हम शायद आठवी में थे तब उसने एक दो बार मुझे लिप्स पर किस करने दिया था। किस से आगे हम दोनों कभी नहीं बढे, लेकिन मेरे लिये उसको किस कर लेना ही बहुत बड़ी बात थी।
जब हम दोनों हाईस्कूल पास करके फ़र्स्ट ईयर और इन्टर में आ गये थे, उसके बाद से मम्मी हम दोनों को घर पर एक दो दिन के लिये अकेला छोड़कर रिश्तदारीयों के शादी ब्याह, उठावनी या फ़िर किसी और फ़न्क्शन में या फ़िर मामा के पास अपने मायके अक्सर जाने लगी थीं। उनको भी लगने लगा था कि अब हम इतने बड़े हो गये हैं कि एक दो रात अकेले रह सकें। सरकारी नौकरी की वजह से मम्मी को छुट्टी की भी कोई ज्यादा परेशानी नहीं होती थी।
जब निकिता अठारह साल की हुई, तब टेक्नीकली मैं भी अठारह साल का ही था, क्यों कि मुझे उन्नीस साल क होने में अभी कुछ हफ़्ते बाकि थे। मैं उस उम्र में भी अन्य लड़कों के विपरीत बिल्कुल कुँवारा ही था, हाँलांकि मैं बाकी सभी टीन-एज लड़कों की तरह हर मसले को अपने हाथ में लेकर उसका समधान कर लिया करता था, मेरे दिमाग में हमेशा सैक्स ही घूमता रहता, लेकिन जहाँ तक चुदाई के एक्स्पीरियेन्स का सवाल है, तो मेरा एक्स्पीरियेन्स बस सोनम को दो बार किस करने तक, और पॉर्न मैगजीन देखकर मुट्ठ मारने तक सिमटा हुआ था। मैं स्लिम बिल्ट का था और मेरी लम्बाई 5 फ़ुट 8 इन्च थी, निकिता मेरे से 3-4 इन्च छोटी थी, इस सब के बावजूद फ़िर भी लोगबाग पूछा करते थे कि क्या हम दोनो, जुड़वाँ हैं?
जैसा कि मैंने बताया कि निकिता मुझ से 3-4 इन्च छोटी थी यानि कि वो 5 फ़ुट 4 या सांकेतिक इन्च की होगी, वो पतली दुबली छरहरी काया की थी, उसकी गाँड़ और पतली लम्बी टाँगें किसी को भी अपना दीवाना बना सकती थीं। उसकी चुँचीयाँ हाँलांकि छोटी छोटी थीं, मेरे अनुमान से शायद उसकी ब्रा का साईज 32 रहा होगा। वो अपने बालों का पोनीटेल बना कर रखती थी। और जहाँ तक मुझे पता था कि उस वक्त अठारह साल की उम्र तक उसका कोई भी बॉय फ़्रेन्ड नहीं रहा था।
निकिता के अठारहवें बर्थ डे के बाद एक बार मम्मी जब कहीं पर गयी हुई थीं, तब हम दोनों देर रात टीवी पर कोई मूवी देख रहे थे। उस मूवी में गर्मा गर्म चूमा चाटी और किसिंग के कुछ द्रष्य थे, हाँलांकि चुँकि ये किसी फ़्री टू ऐअर चैनल पर आ रही थी इसलिये ज्यादा तर गर्म सीन काट दिये गये थे। मैंने निकिता की तरफ़ देखा वो उन गर्म सीन को देखने में मशगूल थी। हम दोनों अलग अलग सोफ़े पर बैठे हुए थे, मैं थ्री सीटर पर और निकिता मेरी बांयीं तरफ़ सिन्गल सीटर पर बैठी हुई थी, उसने डेनिम का नेकर और काला टॉप और सैण्ड्ल पहन रखे थे, और हमेशा की तरह उसने बालों का पोनीटेल बना रखा था।
जैसे ही मूवी खतम हुई, निकिता उठकर मेरे पास मेरे सोफ़े पर आकर बैठ गयी।
“विशाल?” उसने कहा। .
“क्या?” मैंने टीवी की तरफ़ देखते हुए ही पूछा।
“क्या तुमने किसी लड़की को किस किया है?” निकिता ने पूछा।
“हाँ,” मैंने उसकी तरफ़ देखते हुए जवाब दिया, हाँलांकि मैं उसके सवाल से अचरज में था। “हाँ, भाई किया है।”
निकिता एक मिनट तक खामोश रही, इसलिये मैं फ़िर से टीवी देखने लगा। मैं उसका सवाल सुनकर थोड़ा हैरान तो जरूर था।
”कितनी बार?” उसने मुस्कुराते हुए पूछा, ”तुमने कितनी लड़कियों को किस किया है?”
मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी, लेकिन मैं उसका सवाल सुनकर अपने आप को मुस्कुराने से रोक नहीं पाया, और मैंने जवाब दिया, ”ज्यादा नहीं।”
“कितनी?” निकिता ने उत्सुकता के साथ पूछा, “नम्बर बताओ।”
“तुमको इस सब से क्या मतलब है,” मैंने जवाब दिया, हाँलांकि सच तो ये था कि टीवी पर अभी अभी ऐसे सीन देखकर मैं भी इस विषय पर और ज्यादा बात करने में इन्टरेस्ट्ड था।
“कम ऑन,” निकिता ढीठता के साथ बोली, “तुमने किस को किस किया है? अगर तुम उनका नाम नहीं बताओगे मैं समझूँगी कि होंगी कोई बदसूरत सी।”
“चलो ठीक है,”मैं समझ गया कि ये अब नाम जाने बिना मानने वाली नहीं है, ”चलो तो सुनो उनमें से एक सोनम भी है, जिसको तुम अच्छी तरह जानती हो।”
“पूनम?” निकिता ने थोड़ा अचम्भित होते हुए पूछा, लेकिन फ़िर यकायक उसके चेहरे के भाव बदल गये, और उसने मेरा मजाक उड़ाते हुए कहा, ”लाईन में लग कर किस किया होगा?” हाँलांकि सोनम हम दोनों की कॉमन फ़्रेण्ड थी, लेकिन निकिता उस के चाल चलन से भली भांति परिचित थी।
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